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संकल्प

महाराज श्री का संकल्प महाराज श्री वैश्विक बंधुत्व शांति के लिए सालो से महायज्ञ कर रहे है। आम जन मानस में शांति एकता का भाव जागृत करने के लक्ष्य पर आगे बढ़ रहे है । सांसारिक जीवन में रहते हुए पारिवारिक इंसान आध्यामिक मार्ग में कैसे आगे बढ़ सकता है इसकी सीख महाराज श्री दे रहे हैं। महाराज श्री का लक्ष्य है कि युवाओं के लिए आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर केंद्रित गुरुकुल विद्यालय पूरे देश में संचालित हो इसकी छोटी शुरुआत रामेश्वर धाम में ही गुरुकुल स्थापित करने से की गई है। महाराज राम की मर्यादा और कृष्ण के प्रबंधन को स्कूल कालेज के सिलेबस का हिस्सा बनाना चाहते है। महाराज श्री ने अलीगढ़ जनपद में राम कृष्ण विश्विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। महाराज श्री ने बुजुर्गो के लिए अपना घरौदा आवासीय परिसर बनाने के मिशन की शुरुआत की है। महाराज श्री गांव देहात तक चिकित्सीय प्रणाली को पहुंचाने के अभियान पर है जहा निशुल्क और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाए जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराई जा सकें। महाराज श्री का निर्देश है कि भोजन शालाओं का विस्तार हो जिससे शहर गांव धन के अभाव में किसी को धनाभाव की समस्या ना हो ।

महाराज श्री की कृपा से जब वो इस ज्ञान को जान जाता है तो उस समय जो आनंद प्राप्त होता है वही परमानंद है। परमानंद वह अवस्था है जिसमें इंसान अपनी सुध बुध खो देता है और केवल प्रभु और अपने आप में संबंध स्थापित कर लेता है । वह भूल जाता है कि हमारे आगे पीछे सामने हमारी दुनिया में और कोई भी है। हमें तो होश तब आता है जब कोई हमें इस अवस्था से जगाता है तब हमें महसूस होता है कि हम ईश्वर की दुनिया में ना होकर सांसारिक दुनिया में जी रहे हैं वास्तव में यह अवस्था एक अनंत आनंद को देने वाली होती है ऐसा आनंद जो कभी समाप्त नहीं होता बल्कि निरंतर बढ़ता ही जाता है।आनंद के स्रोत को पहचानना ही अध्यात्म का चरम है। इस स्थिति में भूख, प्यास, नींद, मान-अपमान, यश-अपयश और पाप-पुण्य आदि की चिंताएँ खत्म हो जाती हैं। चारों तरफ आनंद ही आनंद होता है।